ऐ कैसी जीन्दगी
ये कैसी ज़िंदगी
मैंने सोचा मां का
कर्ज चुकाऊंगा
प्यार ने कैसी फांसी
लगवा दिया
जिस मां ने मुझे
जन्म दिया उसको भी
प्यार ने चाकू मरवा दिया
प्यार ने चाकू मरवा दिया
जब-जब रोया होगा, मां ने दुध पिलाया होगा
उसके बदले में प्यार
ने क्या ज़हर पिला दिया
प्यार ने क्या दवा पिलाई, मम्मी पापा ज़हर से
लगते
प्यार ने अपने माया
जाल में घुमा कर, कांटो के राहो पर
लेटा दिया
प्यार ने ऐसी चाकू
मारी, जो घाव कभी ना सूखे
तड़प-तड़प कर मैं
रोता कोई न चुप कराने वाला
जिसने मुझे छांव में
बिठाया उसको क्या सजा दिलाई
रो-रो कर मैं पुरी
ज़िंदगी बिताऊ


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