मत छीनों मेरी शिक्षा

मत तोड़ों अधि खिली कली को  उसको भी फूल बन जाने दो
मत छीनों मेरी शिक्षा मुझको भी फूल बन आने दो
मत खेलो मेरे भविष्य से मुझको भी देश में रह कर कुछ कर  के दिखलाने दो 
मत बिछाओं कोमल पैरों के तले कांटे मुझको भी राहों पर चल जाने दो
मत खेलों नादान बेगुना
हों से उनकों भी अपने पैरों पर खड़े होने दो
मत तोड़ोंं मेरे कोमल पंखों को मुझको भी उड़ जाने दो
मत भटकाओं शिक्षा से मुझकों अपने राहों पर चल जाने दो
मत चलना सिखलाओं कट्टर पंथी की राहों पर मुझकों भी भारत माता की गोदी में खेलने दो
मत घोलों ज़हर दिल में नादान बेगुनाहों के भारत माता के अमृत दूध पीने दो 
मत छिनों मेरी शिक्षा मुझकों भी शिक्षा को गले लगाने दो
मत तोड़ों अधिखिली कली को  उसको भी फूल बन जाने दो
मत छीनों मेरी शिक्षा मुझकों भी फूल बन जाने दो
          उमा शंकर शर्मा
          

        





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