कहां जा रहा है देश का भविष्य...

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कहां जा रहा है देश का भविष्य...

कहते है कि बच्चे भगवान के रुप होते है... यह बच्चे हमारे देश का आने वाला भविष्य होते है...पर हिंदुस्तान के कितने बच्चे है जो हमारे देश का भविष्य बनते है...
जब हम सब बड़े गये तो हम अक्सर यह बात करते हैं कि कितना अच्छा था हमारा बचपन...मन ही मन सोचते हैं कि काश वापस पहुंच जाए हम अपने बचपन में... और लौट कर आ जाएं हमारे बचपन के वो दिन...
पर कहां है आज के बहुत से बच्चे ? जो देश के भविष्य बने है...
आज सैकड़ों बच्चे गुमनामी की जिंदगी व्यतीत कर रहे है...ऐसे कई बच्चे है जिनके पैदा होते ही दीमक लग जाती है...उनके बचपन की कई केस इस तरह से सुनने में आते है...कि किसी महिला ने अपना पाप छिपाने के लिए अपने नवजात बच्चे को फेंक दिया कही कचरे के ढ़ेर में...यदि वह कुत्तों और सुअरों का भोजन नहीं बना तो जीवन भर झेलेगा नरक सी जिंदगी...इस नरक सी जिंदगी को हिंदुस्तान में बहुत से बच्चे जी रहें है...हमारे देश का भविष्य और भगवान का रुप आज आपको देखने को मिल जाएगा किसी चाय की दुकान पर लोगों के जूठे गिलास धोते हुए...कई बच्चे की जिंदगी निकल जाती है ढ़ाबों की अंधेरी कोठरी में और बहुत बड़े संख्या में ये भगवान हमें भिखारियों के रुप में मिल जाएंगे... कुछ बच्चे तो यह सब मजबूरीवस करते है.. और कुछ बच्चों से ये सब करवाया जाता है...जहां सरकार ये कह रही है कि देश के हर बच्चे के लिए शिक्षा पाना उसका कानूनी अधिकार है...वही बहुत से बच्चे उसी सरकार के बहुत से मंत्रियों और अधिकारियों के यहां दिन-रात कड़ी मेहनत करते है...और ये सब यूं ही चलता रहता है...पीढ़ी दर पीढ़ी जब सरकार के नाक के नीचे ये सब बेधड़क होता है तो फिर अन्य जगह क्यों नहीं...
कई बच्चे परिवार के जिम्मेदारियों को अपने ऊपर ले लेते है जिन्हें ये सब करनी पड़ती है...बचपन से ही कड़ी मेहनत करते हुए कब ये बच्चे बड़े हो जाते है यह उन्हें भी नहीं मालूम पड़ता है...कुछ बच्चे पढ़ना चाहते है.. पर उनके मां-बाप अपने शौक पूरा करने के लिए झोक देते है उन्हें मजदूरी की भट्ठी में...आज स्थिति बहुत गंभीर हो गई है...देश में कई ऐसे गैंग हो गये हैं...जो मानव तस्कर का काम करते है और इन मासूमों का इस्तेमाल गलत जगहों पर कर रहे है...ये मानव तस्कर बच्चे को अगवा कर उनके अंग काटकर उन्हें भिखारी तक बना देते है...दुनिया में ऐसे लाखो करोंड़ों बच्चे है जिन्हें यह तक नहीं मालूम कि बचपन होता क्या है.. और बचपन कहते किसे है...ऐसे लाखों बच्चे है जिनके सिर पर ना तो छत है ना ही मां-बाप का साया...ऐसे बच्चे जिनके ऊपर मां-बाप का साया नहीं है...वो जीवन भर पिसते रहते है यूं ही किसी साइकिल की दुकान पर या यूं ही भटकते रहते हैं मारे-मारे सड़कों पर... सरकार आज इन बच्चों के लिए कुछ भी नहीं कर रही है...बस खानापूर्ति बाल, श्रमिक अधिनियम के नाम पर करती दिखती है...



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जब हम एक ऐसे बच्चे से जानना चाहा जो सुबह 5 बजे अखबार देने आता है...मैंने उस बच्चे से पूछा तुम इतना जल्दी कैसे उठ जाते हो और इतनी सुबह, सर्दी, गर्मी और बरसात में अखबार बांटते हो... तो वह बोला यह तो कुछ नहीं है बाबूजी अखबार बांटने के बाद मैं एक राशन की दुकान पर काम करने जाता हूं... और शाम को एक चाय की दुकान पर रात 10 बजे तक काम करता हूं... अगर मैं एक दिन भी यह सब न करुं तो पता नहीं मेरे घर चूल्हा जलेगा या नहीं...इसका अंदाजा आप बड़े लोग नहीं लगा सकते है...हमारा तो जीवन ही इसलिए बना है कि हम बस काम करते रहें और कुछ नहीं...
जब यह बच्चे बड़े हो जाते है और कोई इनसे यह पूछ लेता है कि आपका बचपन कैसा था तो यही बच्चे अक्सर कहते है कि ये बचपन क्या होता है और किस चिड़ियां का नाम है हम नहीं जानते है हम तो सिर्फ काम करना जानते है...और कुछ नहीं बचपन तो अमीरों का होता है...हम तो गरीब और बेसहारा पैदा हुए है...और यूं ही लावारिसों की तरह एक दिन खत्म हो जाएंगे...हमारे देश का भविष्य यूं ही दर-दर, गली-गली ठोकरें खा रहा है और हम सब खामोश है..ये बचपन क्या होता है क्या आप जानते है....

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